The Rest Frame

Ola Vristi

Shyam Sunder

मेरा नाम गोपाल किसान है
कल मेरे खेत ओलावृष्टि हुई।

गेहूँ थी, बालियाँ निकालकर खड़ी 
टूटकर बिखर गई, ख़राब हो गयी;
चना था, वो भी काला पङ गया 
पूरी की पूरी फसल बर्बाद हो गयी।

 कल नष्ट मेरी सारी सृष्टि हुई
मेरा नाम गोपाल किसान है
कल मेरे खेत ओलावृष्टि हुई।

बेटा मेरा बड़े स्कूल में पढ़ रहा है
क्या मैं उसकी फीस भर पाऊँगा;
ट्रैक्टर की किश्त इस महीने देनी है
मैं इतना पैसा किधर से लाऊँगा।

पिताजी की बीमारी के इलाज में 
लिया था वो कर्जा भी मोड़ना है;
अगले साल भांजी की शादी है ना
 उसका दायजा भी जोड़ना है। 

न जाने किसकी कुदृष्टि हुई 
मेरा नाम गोपाल किसान है
कल मेरे खेत ओलावृष्टि हुई।

खाने लायक बच गया आनाज
बस इतना ही मेरे लिए काफी है;
अगले साल हो जाएगी फसल
इतनी उम्मीद अभी बाकी है साहब। 

अब तो चाहे कुछ भी हो जाए साहब 
हालातों से लङूंगा, कभी नहीं डरूंगा ;
एक किसान हूँ, किसान का बेटा हूँ 
हारुँगा पर आत्महत्या नहीं करूंगा। 

ऐसी कहाँ मेरी किसान प्रवृति हुई
मैं गोपाल किसान हूँ साहब 
कल मेरे खेत ओलावृष्टि हुई ।

A poem to give sympathy to the farmers, their crops have vanished in the hailstorm.